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Showing posts from November, 2019

Quran hydrology science

[जल विज्ञान (hydrology) आज हम जिस संकल्पना को ‘जल- चक्र:water cycle नाम से जानते हैं उसकी संस्थापना: 1580 ई0 में बरनॉर्ड प्लेसी bemard placy ने की थी। उसने बताया-किस प्रकार समुद्रों से जल का वाष्पीकरण evaporation होता है, और तत्पश्चात किस प्रकार वह ठंडा होकर बादलों के रूप में परिवर्तित होता है फिर उसके बाद, शुष्क खुश्क वातावरण में आगे की ओर उड़ते हुए ऊंचाई की तरफ़ बढ़ता है उसमें जल का ‘‘संघनन:condensation होता है और वर्षा होती है। उसी वर्षा का पानी झीलों, झरनों, नदियों और नहरों में अपना आकार लेता है और अपनी गति से बहता हुआ वापिस समुद्र में चला जाता है इसी प्रकार यह जल-चक्र जारी रहता है सातवीं सदी ईसा पूर्व में थैल्ज thelchz नामक एक यूनानी दार्शनिक को विश्वास था कि सामुद्रिक धरातल पर एक बारीक जल-बूंदों की फुहार spray उत्पन्न होती है जिसे हवा उठा लेती है और ख़ुश्की के दूर दराज़ क्षेत्रों तक ले जाकर वर्षा के रूप में छोड़ देती है, जिसे बारिश कहते हैं इसके अलावा पुराने समये में लोग यह भी नहीं जानते थे कि ज़मीन के नीचे पानी का स्रोत क्या है? उनका विचार था कि वायु [शक्ति के अंतर्गत समं...

Quran natural science

प्राकृतिक-विज्ञान Natural Science परमाणु भी विभाजित किये जा सकते हैं प्राचीन काल में परमाणुवाद: atomism के दृष्टिकोण शीर्षक से एक सिद्ध दृष्टिकोण को व्यापक धरातल पर स्वीकर किया जाता था यह दृष्टिकोण आज से 2300 वर्ष पहले यूनानी दर्शनशास्न्नी विमाक्रातिस vimacratis ने पेश किया था विमाक्रातिस और उसके वैचारिक अनुयायी की संकल्पना थी कि, द्रव्य की न्यूनतम इकाई परमाणु है प्राचीन अरब वासी भी इसी संकल्पना के समर्थक थे। अरबी शब्द, ‘‘ज़र्रा: अणु का मतलब वही था जिसे यूनानी ‘ऐटम‘ कहते थे। निकटतम इतिहास में विज्ञान ने यह खोज की है कि ‘,परमाणु‘‘ को भी विभाजित करना सम्भव है, परमाणु के विभाजन योग्य होने की कल्पना भी बीसवीं सदी की वैज्ञानिक सक्रियता में शामिल है। चौदह शताब्दि पहले अरबों के लिये भी यह कल्पना असाधारण होती। उनके समक्ष ज़र्रा अथवा ‘अणु‘ की ऐसी सीमा थी जिसके आगे और विभाजन सम्भव नहीं था लेकिन पवित्र क़ुरआन की निम्नलिखित आयत में अल्लाह ने परमाणु सीमा को अंतिम सीमा मानने से इन्कार कर दिया है। "मुनकरीन ( विरोधी ) कहते हैं: क्या बात है कि क़यामत हम पर नहीं आ रही हैं? कहो! क़सम है मेरे ...